फागण के दोहें… कान्हा चरणा अर्पण करू , होळी रा रंग गुलाल। मनडा भेद दूर करो , मानव मन मलाल।। राधा रंगी गुलाल म्ह , कान्हा हाथां रंग। वृन्दावन की प्रेम गली , गैरया बजावैं चंग।। गौरडी बैठी गोखडे , कर सौलह सिण्गार। साजन बैठ्या प्रदेश मं , ओ रंगा को त्यौहार।। फागण मास रंग रसिया , करै कालजै घाव। औळू हेत मनडा बसे , पिव परदेशी आव।। माथें बैवडों गौरडी , चाली पणघट गेल। पाणी पडछा भर गया , होली रंग रो खेल।। फाग खैले गौरड्यां , गैरया बजावै चंग। घूमर घाले गौरडी , फागण को यो रंग।। लाल-पीळी रंगी गौरड्यां , जोबन को यो रंग। नैन कटारी हिये लागे , फागण म्ह यो चंग।। गाबा-लत्ता तन लाग्या , हिवडे उठी बाठ। पिव मिलन री आसमें , होळी में सब ठाठ।। गली गली उडे गुलाल , हिल मिल खैले फाग। नाचे मन म्ह मोरडी , होळी मीठी राग।। मन रो मेल धूळ ग्यों , फागण रंग मं चोली। घूमर घाले गोरडी , "नरेन्द्र" आज होली।। नरेन्द्र सिंह धन्नावत "टोंक"