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लेख - 3 बडवा जाति के गौरव …संत कवि सकतेश

बडवा जाति के गौरव   संत कवि सकतेश इस श्रैणी में दतोब (टोंक) निवासी संत कविवर सगत सिंह जी का नाम बडवा जाति में अमरता को प्राप्त हैं। आपका जन्म विक्रम संवत 1882 के मास कार्तिक शुक्ला व्दितीया सोमवार को हुआ था। आपके पिता श्री का नाम मालम सिंह जी था।         कवि वंश वर्णन नाग शयन निज नाभितें , निरज प्रगट नवीन। अज निरज तें प्रगट भये , कली विचित्रता कीन।।   छपय छन्द ब्रह्म विस्व विस्तार वंश हूं रचे विचक्षण। प्रगटे तिनके पुत्र सूत मागध शुभ लक्षण। वेद चतुर मुख ब्रिन्च शास्त्र खत सूत स्मरपे। वंश अंश बडवार आप लिखी मागध अरपे। प्रार्थना किन प्रिती सहिंत दुर्गा बुध्दी वरदान दिये। बैठार पाट विधि विष्नु शिव त्रिदेवन मिल तिलक किये।।              दोहा बरनत वाही वंश को बहुत ग्रंथ बढ़ी जाय। सुक्षम मति सकतेश कवि उपज्यो तिहिं कुल आय। बहु साखिंन ते बासबर , नगर दतोब निधान। प्रथम पुरखन पाईयो , महिपालन तें मान।। धीर धरमशी देवसी , कणु पाल किम पाल। उधरण गोलुसी गुनी , भूपन के भिडियाल।। खरहत लाला खग बलि , पुरनमल ...
वंशावली की उत्पति और महत्व … नरेन्द्र सिंह धन्नावत "टोंक" (राज•) सनातन धर्म में वंशावली लेखन व स्तुति की उत्पति का उल्लेख राजा पृथु से मिलता हैं। श्लोक :-- राजसुया अभिषिक्ताना मागध सब सुध्द दियतस्मा चेव: समुत्पन्नो , निपुणों सूत मागधो " हरिवंश पुराण ! यज्ञ से अभिषिक्त राजाऔं में प्रथम पृथु उत्पन्न हुए।बाद में उसी यज्ञ से सूत , मागध हुयें। " तास्मिन्द्रो महायज्ञ प्रप्ते यज्ञડथ मागध "  उसी यज्ञोपवीत से मागध जी हुयें।( शिव पुराण धर्म संहिता षटपंचादश अध्याय 56) ऐसा ही विष्णु पुराण अं• 1अ•13 श्लोक 52 में लिखा हैं :-- यथा " तस्मिभेव महायज्ञो जज्ञो प्रज्ञो थ मागध: " अर्थात पृथु के यज्ञ से मागध का जन्म हुआ। सूत मागध जी की उत्पति के बाद दोनो को महर्षियों ने महाराज पृथु की स्तुति करने लियें कहा गया। श्लोक :--  " तच्छ त्वाशीस्तु चक्राते यज्ञस्तो सूट मागध " -- शिव पुराण  यह कार्य तुम्हारे अनुकूल है और महाराज पृथु इसके अनुरूप हैं। यह सुन सूत , मागध ने कहा हम अपने कर्मो से देवताऔ तथा ऋषियों को प्रसन्न करते हैं। इन महाराजा...